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शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

तीन तैराक

तीन तैराक थे। एक ने समझा तैरना मतलब पानी के ऊपर रहना है और पानी के ऊपर रहना ही सीखा और एक दिन थक जाने से डूब गया। दूसरे ने तैरना मतलब पानी के अंदर ज्यादा देर रहना और गति करना समझा और जब भी वह थक जाता तो ऊपर आकर सांस लेता और फिर गहरे पानी में चला जाता। वह धीरे धीरे पानी के ऊपर और नीचे दोनों स्तिथि का अभ्यस्त हो गया और समंदर पार कर गया और ढेर सारी मोतियाँ भी इकठ्ठी कर लीं। तीसरा तैराक भी दूसरे की तरह ही था लेकिन अभिमानी था और ईर्ष्या से ज्यादा और ज्यादा देर तक पानी में रहने का प्रयास करते करते पानी का आदि हो गया लेकिन फिर उससे सतह की सामान्य वायु नहीं ली जाती थी और वह भी पानी में ही डूब गया। मैं समंदर हूँ और वो तीन तैराक है :शरीर , बुद्धि और आत्मा। हरी ॐ नमः शिवाय

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